*माही ने शैक्षिक व सांस्कृतिक मेले में शानदार प्रदर्शन के लिए मॉडर्न इंग्लिश स्कूल को सम्मानित किया*
*दुनिया के ज्यादातर क़ामयाब लोग साधारण व संघर्षशील परिवारों से ही संबंध रखते हैं: सरफ़राज़ अहमद सफ्फु*
*देश के कई विभूतियों ने संसाधनों की कमी के बावजूद इतिहास में अपने स्थान को सुनिश्चित किया,देश को गौरव का एहसास कराया :मुस्तक़ीम आलम (प्रवक्ता माही)*
*राँची* : *मौलाना आजाद ह्यूमेन इनिशिएटिव (माही)* के अंतर्गत
*हिंदपीड़ी छोटा तालाब स्थित मॉडर्न इंग्लिश स्कूल* में एक पुरूष्कार कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में वैसे छात्र-छात्राओं को पुरष्कृत किया गया जिन्होंने 11 नवंबर को कडरू स्थित माही द्वारा हज हाउस में *शैक्षिक एवं सांस्कृतिक मेले* में हिस्सा लिया और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, आज इस कार्यक्रम में वैसे बच्चों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्कूल के *निदेशक श्री राजकुमार को मेले से संबंधित मेमोरी फ़ोटो एवं स्कूल पार्टिसिपेशन अवार्ड से नवाजा गया एवं मेले में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल एवं सर्टिफिकेट प्रदान किये गए*। इस कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षा एवं सांस्कृतिक मेले के मंच का सफलतापूर्वक संचालन करने वाली *ज़ाकिरा सालेहा कमाल* को भी मेमोरी फ़ोटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर *आई०टी० विशेषज्ञ सरफ़राज़ अहमद सफ्फु* ने कहा कि किसी भी समाज में, सफलता की कहानियां हमें बहुत कुछ सिखाती हैं। वे व्यक्तित्व जो साधारण परिवारों से निकल कर सफलता की ऊँचाइयों को छूते हैं, अपने सपनों को हासिल करने के लिए संघर्ष करते हैं, उनकी कहानियां हमें एक नई दृष्टि देती हैं। क़ामयाबी का राज क्या हो सकता है? क्या एक साधारण परिवार से आने वाले कोई व्यक्ति सफलता की चोटी पर पहुंच सकता है? यह वास्तव में महत्त्वपूर्ण और रोचक सवाल है।
उन्होंने ने कहा हम सभी ने ऐसे कई उदाहरण देखे होंगे जहाँ से ज्यादातर सफल व्यक्तियां साधारण परिवारों से होकर आगे बढ़ी हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से सपनों को हकीकत में बदला है। यहाँ पर एक बात बहुत ही स्पष्ट होती है - सफलता और उसकी ऊँचाइयों की कोई निश्चित परिभाषा नहीं होती, बल्कि वह केवल मेहनत, संघर्ष, और दृढ़ संकल्प के बाद ही हासिल होती है। अपने सपनों में विश्वास रखना ही असली सफलता की कुंजी है।
जीवन में सफलता के मापदंड कई बार समय, सम्भावनाएं, और अवसरों के साथ जुड़ा होता है। लेकिन यह सच है कि उसमें समर्पण, आत्म-विश्वास, और निरंतर मेहनत का बहुत बड़ा योगदान होता है।
इससे पूर्व *माही के प्रवक्ता एवं पत्रकार मुस्तक़ीम आलम* ने कहा कि प्रिय छात्रों, हर इंसान का एक सपना एक लक्ष्य होता है, विशेष कर जो लोग शिक्षा ग्रहण करते हैं तो स्कूल-कॉलेज में पढ़ने के समय ही भविष्य निर्माण के लिए अपने लक्ष्यों को निर्धारित करते हैं और सपने को साकार करने में लग जाते हैं। आपके सपने को पूरा करने में आपके अभिभावक, शिक्षक और शुभचिंतक भी सहभागी बनते हैं।आप पर एक साथ कई सपने को साकार करने की जिम्मेदारी है और आप जब सफल होते हैं तो अपने लक्ष्यों को पाते हैं और आपके सपने साकार भी होते हैं। देश के कई विभूतियों ने संसाधनों की कमी के बावजूद इतिहास में अपने स्थान को सुनिश्चित किया,देश को गौरव का एहसास कराया।आप भी कर सकते हैं, कमियों की अनदेखी कर सपनों को साकार करने में लग जाएं।
*मंच का संचालन मोहम्मद सलाहउद्दीन एवं धन्यवाद ज्ञापन सरवर इमाम खान ने किया।*
इस अवसर पर माही के उपाध्यक्ष हाजी नवाब,अशफ़ाक गुडडू, नैय्यर परवेज़ डाईमण्ड,