55 साल से संस्थान में समर्पित रूप से दे रहे थे सेवाएं- नौ साल तक भारतीय नौसेना में दी सेवा- 22 सितंबर को सुबह 10 बजे आबू रोड के मुक्तिधाम में होगा अंतिम संस्कारआबू रोड। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के महासचिव 86 वर्षीय राजयोगी बीके निर्वैर भाई का देवलोकगमन हो गया। अहमदाबाद के अपोलो हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। वे कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन से ब्रह्माकुमारीज़ परिवार में शोक की लहर है। देश-विदेश में स्थित सेवाकेंद्रों पर ध्यान-साधना का दौर चल रहा है। उनकी पार्थिक देह को अंतिम दर्शन के लिए मुख्यालय शांतिवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में लोगोंं के दर्शनार्थ रखा गया। माउंट आबू स्थित पांडव भवन, ज्ञान सरोवर, ग्लोबल हॉस्पिटल, म्यूजियम की यात्रा करते हुए आबू रोड मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया जाएगा। पार्थिव शरीर शांतिवन आने पर संस्थान प्रमुख राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी, संयुक्त मुख्य प्रशासिका बीके मुन्नी, बीके शशि, अतिरिक्त महासचिव बीके बृजमोहन, मीडिया प्रमुख बीके करुणा, कार्यकारी सचिव बीके मृत्युंजय, अमेरिका से आयी बीके गायत्री समेत सैकड़ों लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की।मीडिया निदेशक बीके करुणा भाई ने बताया कि बीके निर्वैर भाई के फेफड़ों में इन्फेक्शन होने पर 5-6 दिन पहले अहमदाबाद के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां पर गुरुवार रात में अचानक अटैक आने से निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही देशभर से संस्थान के वरिष्ठ ब्रह्माकुमार भाई-बहनों का शांतिवन पहुंचना शुरू हो गया है।1960 में ब्रह्मा बाबा से मिलने के बाद बदल गई जीवन की दिशा-वर्ष 1959 की बात है। पंजाब में ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेंद्र की शुरुआत हुई। अध्यात्म और योग में रुचि होने के कारण आप संस्थान से जुड़ गए और नियमित रूप से आध्यात्मिक सत्संग में भाग लेने लगे। लेकिन माउंट आबू में वर्ष 1960 में संस्थापक ब्रह्मा बाबा से मिलने के बाद आपके जीवन की दिशा बदल गई। तभी आपने निश्चय कर लिया कि अब पूरा जीवन समाजसेवा और विश्व कल्याण के लिए समर्पित करना है। इसके बाद आपने भारतीय नौसेवा से इस्तीफा देकर पूरी माउंट आबू आए और यहीं के होकर रह गए। आप पिछले 55 साल से अपनी सेवाएं दे रहे थे। विभिन्न पुरस्कारों से नवाजा गया-- वर्ष 1999 में इंटरनेशनल पेंगुइन पब्लिशिंग हाउस द्वारा 'राइजिंग पर्सनालिटीज ऑफ इंडिया अवॉर्ड- वर्ष 2001 में गुजरात के राज्यपाल द्वारा गुजरात गौरव पुरस्कार के तहत 'मोरारजी देसाई शांति शिक्षा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया।- इसके अलावा समय प्रति समय कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा आपको सम्मान किया गया।मुख्यालय के मैनेजमेंट में रही अहम भूमिका-वर्ष 1974 से लेकर आज तक ब्रह्माकुमारीज़ के मुख्यालय के शांतिवन परिसर, मनमोहिनीवन, आनंद सरोवर, मान सरोवर, ज्ञान सरोवर के निर्माण से लेकर मैनेजमेंट में आपकी अहम भूमिका रही। आपके कुशल मार्गदर्शन में अनेक ऐतिहासिक कार्य किए गए।--