*अनंत चतुर्दशी पर्व हिंदू सनातन धर्म में बेहद खास महत्व: संजय सर्राफ

विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि अनंत चतुर्दशी पर्व 17 सितंबर को मनाया जाएगा। इस वर्ष भादो मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 16 सितंबर दिन सोमवार की दोपहर 3 बजकर 10 मिनट से शुरू होगा तथा इसका समापन अगले दिन यानी 17 सितंबर दिन मंगलवार को सुबह 11 बजकर 44 मिनट पर होगा। ऐसे मे उदया तिथि के अनुसार अनंत चतुर्दशी का पर्व 17 सितंबर को मनाया जाएगा।हिंदू सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। इस तिथि पर भगवान विष्णु के अनंत रूपों की आराधना करने का विधान है, अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस भी कहा जाता है। इस दिन जहां बप्पा श्री गणेश की बड़ी धूमधाम से विदाई की जाती है। दरअसल गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा को घर लाया जाता है और पूरे 10 दिनों तक विधिवत उनकी पूजा अर्चना की जाती है। अनंत चतुर्दशी के दिन श्री गणेश जी का विसर्जन किया जाता है। इस दिन  भगवान विष्णु की पूजा पूरे विधि विधान के साथ की जाती है। इस दिन अनंत सूत्र का भी विशेष महत्व माना गया है इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के बाद एक कच्ची रेशम की डोरी को हल्दी या केसर से रंग कर उसके बाद उस डोर में 14 गांठ लगाए और इसे प्रभु श्री हरि के चरणों में अर्पित करने तथा ओम अनंताय नमः मंत्र की जाप करने के बाद इस दिव्य को पुरुष अपने दाएं हाथ में बांधे तथा महिलाएं इस सूत्र को अपने बाएं हाथ में बांधना चाहिए। एवं विधि विधान से पूजा अर्चना, दीपक जलाकर आरती तथा कथा का पाठ, प्रभु को फल और मिठाई समेत चीजों का भोग लगाना चाहिए। रात के समय इस रक्षा सूत्र को उतारकर रख दे और अगले दिन किसी पवित्र नदी या तालाब में प्रवाहित कर दें, माना जाता है कि इस कार्य को करने से साधक के सभी प्रकार के पाप एवं दुख नष्ट होते हैं और उसे आरोग्य जीवन का आशीर्वाद तथा भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है।