*आदिवासी महिला गैर आदिवासी पुरुष से शादी कर एसटी सीट पर चुनाव लड़ना आदिवासियों की हक मारी है!*

आज आदिवासी समन्वय समिति के सयोजक लक्ष्मीनारायण मुण्डा एवं कांके रोड सरना समिति के अध्यक्ष डब्लू मुण्डा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कीआदिवासियों के लिए 28 सीट आरक्षित किए गए हैं। कुछ सीट में आदिवासी महिला जो गैर आदिवासी से शादी कर चुकी है, उन्हें भी विधान सभा चुनाव के लिए टिकट दिया जा रहा है। हम सभी आदिवासी  संगठन इसका पुरजोर विरोध करेंगें। बताते चलें कि जेएमएम ने भी खूंटी विधान सभा से गैर आदिवासी प्रत्याशी को टिकट दिया था, पर विरोध के बाद उसे हटा दिया गया।  खिजरी विधान सभा में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने भी आदिवासी महिला सरीता तिर्की, जो गैर आदिवासी जलेश्वर महतो की पत्नी है को टिकट दिया है। इसी लोहरदगा विधानसभा से एक उम्मीदवार राजपति देवी चुनाव में खड़ी हैं, जो विजय महतो की पत्नी है। यह सीट भी आदिवासियों के लिए आरक्षित है। आदिवासियों के हक - अधिकार मारने की साजिश है।पंचायत चुनाव या विधानसभा चुनाव सभी में ऐसा हो रहा है, जो निंदनीय है।  *आदिवासी समन्वय समिति के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण मुंडा* ने कहा कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत ऐसी आदिवासी महिलाएं जो गैर आदिवासी से शादी कर ली है उसको चुनाव में उतारा जा रहा है यह आदिवासियों के लिए खतरे की घंटी है। *कांके रोड सरना समिति के अध्यक्ष डब्लू मुंडा* ने कहा कि चुनाव आयोग, केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और संवैधानिक संस्थाओं द्वारा इस पर ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह आदिवासी समुदाय के संवैधानिक हक-अधिकारों पर हमला है।