DPDP एक्ट की धारा 44(3) ने [सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005] की धारा 8(1)(j) में संशोधन किया है।

*



पहले, अगर जानकारी सार्वजनिक हित में होती थी, तो निजी जानकारी दी जा सकती थी। अब, 'व्यक्तिगत जानकारी' के नाम पर किसी भी सूचना को देने से मना किया जा सकता है, बिना यह सोचे कि वह जनहित में है या नहीं।
क्या जानकारी नहीं मिलेगी? सरकारी कर्मचारियों की निजी संपत्ति, देनदारियां, या किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत फाइलें जो सरकारी रिकॉर्ड में हैं, उन्हें अब 'निजी' बताकर रोका जा सकता है।

इस संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, क्योंकि यह पारदर्शिता को कम करता है।

DPDP एक्ट, 2023 के बाद, आरटीआई से किसी तीसरे पक्ष (Third Party) की व्यक्तिगत जानकारी पाना अत्यंत कठिन हो गया है, क्योंकि कानून अब निजता के अधिकार (Privacy) को सूचना के अधिकार (RTI) पर प्राथमिकता देता है।

और सबसे मजे की बात है कि किसी पार्टी ने इसका विरोध भी नहीं किया है।🤔🤔