चार श्रम संहिताओं में दो पर बीएमएस की मुहर, दो पर कड़ी आपत्ति




रांची औद्योगिक संबंध और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता में संशोधन की मांग, कार्यसमिति बैठक में 28 बिंदुओं पर जताई असहमति
रांची, 26 जुलाई। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यसमिति की बैठक रविवार को नामकुम स्थित सरला बिरला विश्वविद्यालय के सभागार में शुरू हुई। बैठक के पहले दिन केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताओं पर विस्तार से मंथन हुआ। बीएमएस ने वेतन संहिता-2019 और सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 को श्रमिक हित में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उनका समर्थन किया, जबकि औद्योगिक संबंध संहिता-2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता-2020 के कई प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताई।
बीएमएस का कहना है कि चारों श्रम संहिताएं 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हो चुकी हैं, लेकिन श्रमिक हितों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों में अभी भी सुधार की आवश्यकता है। संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य कानून का विरोध करना नहीं, बल्कि ऐसे प्रावधानों में संशोधन कराना है, जिससे श्रमिकों के अधिकार, रोजगार की सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मान सुनिश्चित हो सके। केंद्र सरकार चारों संहिताओं को 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समेकित करने वाला व्यापक सुधार बताती है।
बैठक में औद्योगिक संबंध संहिता-2020 के विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा करते हुए बीएमएस ने कुल 13 बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई। इनमें उद्योग की परिभाषा, वेतन की परिभाषा, कामगार की परिभाषा, वार्ताकार संघ (नेगोशिएटिंग यूनियन) की मान्यता, वार्षिक विवरणी सहित श्रमिकों और ट्रेड यूनियनों से जुड़े अन्य प्रावधान शामिल हैं। संगठन का मानना है कि इन प्रावधानों को इस तरह संशोधित किया जाना चाहिए, जिससे श्रमिक संगठनों की प्रभावी भूमिका और सामूहिक सौदेबाजी की व्यवस्था मजबूत बनी रहे।
इसी तरह व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता-2020 के प्रावधानों में भी बीएमएस ने 15 बिंदुओं पर आपत्ति जताई। इनमें कारखाने की परिभाषा, वेतन की परिभाषा, कार्य गतिविधि की परिभाषा समेत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। बीएमएस का जोर इस बात पर है कि श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े प्रावधानों में किसी भी प्रकार की ऐसी गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए, जिससे नियोक्ता की सुविधा के सामने श्रमिकों के हित कमजोर पड़ें।
बीएमएस पहले भी इन दोनों संहिताओं में व्यापक विचार-विमर्श के बाद संशोधन की मांग करता रहा है। वहीं संगठन ने वेतन संहिता और सामाजिक सुरक्षा संहिता को श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इनके प्रावधानों का समर्थन किया है। बीएमएस की ओर से श्रम कानूनों को सभी श्रमिकों पर समान रूप से लागू करने और श्रमिकों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई जाती रही है।
बैठक की अध्यक्षता भारतीय मजदूर संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष एस. मल्लेशम ने की, जबकि संचालन अखिल भारतीय महामंत्री सुरेंद्र कुमार पाण्डेय ने किया। बीएमएस के राष्ट्रीय नेतृत्व में दोनों पदाधिकारी वर्ष 2026-29 के लिए निर्वाचित हुए हैं।
बैठक में श्रमिक हितों से जुड़े अन्य समसामयिक विषयों पर भी चर्चा की जा रही है। तीन दिवसीय कार्यसमिति बैठक 26 से 28 जुलाई तक चलेगी, जिसमें देशभर से आए प्रतिनिधि श्रमिकों की समस्याओं, उनके समाधान और श्रम क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।